जींदगी

जींदगी जीने का समय नही

अब तो दौड़ने का जमाना है

जींदगी ,अब खुशियो का नाम नही

अब तो एक दर्द का फसाना है

जींदगी एक हसीन कहानी नही

अब तो एक दुख की कराहना है

जींदगी की इस दौड़ मे थक गये जो

उनको छोड़ आगे बढ़ जाने का जमाना हे

जींदगी जीने का नाम नही

ये तो दर्द का फसाना है..

कभी सोचता हूँ उस पंछी के बारे मे

स्वचंद उड़ता आकाश के उचाईयों मे

कभी उड़ता हे खाने की तलाश मे

कभी उड़ता घोसले की राह मे

बस उड़ता हे जीने की चाह मे

इसके पास भी जींदगी हे

मगर इसे दौड़ना नही बस चलना है

इन थका देने वाली गलियों मे

फिर हमें ही क्यो भटकना है

और इस दौड़ मे शामिल होने के बाद भी

क्यो गम के आँसू पीना है

क्योकि अब ये केवल दौड़ने का समय नही

ये तो सबसे आगे निकल जाने का जमाना है

जींदगी जीने का नाम नही

ये तो दर्द का फसाना है..

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